Kahani Sangrah-Articles Total Articles - 23
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Always be positive

सपने कौन नहीं देखता ?

अगर मेंढक को गर्मा गर्म उबलते पानी में डाल दें तो

ज़िन्दगी खुद को खोजने के बारे में नहीं है. ज़िन्दगी खुद को बनाने के बारे में है.

सफलता विना बाधाओं के नहीं मिलती

जो ताउम्र सीखते हैं वही बुलंदियों पर पहुँचते हैं...

क्योंकि हर सफलता कई असफलताओं के बाद ही मिलती है...

लम्बा कूदना है तो पीछे हटने से मत डरिये

सफलता के 5 कदम

दीमक और घुन केवल लकड़ी और गेहू में ही नहीं बल्कि जिन्दा आदमी में भी लग सकते है

हिम्मत एक प्रवेशद्वार है

चेतना के स्तर

जीवन में सफलता-असफलता, हानि-लाभ, जय-पराजय के अवसर मौसम के समान है

हँसने के पाँच फायदे

परिवर्तन स्वीकार करने का क्रम

परिवर्तन का विरोध सदियों से होता रहा है, किन्तु परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता

पैसिव इनकम (Passive Income) के ज़रिये कमाएं पैसे

5 चीजें जो आपको नहीं करनी चाहिए और क्यों

Focus करता क्या है

कहीं आपकी डिग्री आपके सपने तो नहीं तोड़ रही

Goal Setting: S.M.A.R.T होना चाहिए आपका "लक्ष्य"

करोड़पति बनना है तो नौकरी छोडिये...

हँसना हम सभी के लिये अति महत्वपूर्ण है

परिवर्तन का विरोध सदियों से होता रहा है, किन्तु परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता
 
 

. कई सदियों तक लोग अरस्तु की इस बात को सच मानते रहे कि कोइ वस्तु जितनी ज्यादा भारी होगी, उतनी ही तेजी से नीचे जमीन पर गिरेगी | अरस्तु को सभी युगों के चिंतकों में महानतम चिन्तक का दर्जा मिल चुका था और निश्चित रूप से उनकी कही कोइ बात गलत नहीं हो सकती थी | इस सिध्धान्त की जांच के लिए सिर्फ एक बहादुर आदमी की जरुरत थी जो दो वस्तुओं को लेता, जिनमें से एक भारी और एक हल्की होती, और उन्हें ऊँचाई से गिरा देता, ताकि यह पता चल पाता कि ज्यादा भारी वस्तु पहले जमीन पर पहुँची या नहीं | परन्तु अरस्तु की मौत के २००० साल बाद तक कोइ भी आगे नहीं आया | १५८९ में गैलीलियो ने विद्वान प्रोफेसरों को पीसा की झुकी हुयी मीनार के पास आने का निमंत्रण दिया | फिर वह मीनार की चोटी पर पहुंचा और उसने दो वजन गिराए जिनमें एक दस किलो का और दूसरा एक किलो का था | दोनों ही एक साथ जमीन से टकराए | परन्तु पारंम्परिक ज्ञान में विश्वास की शक्ति इतनी प्रबल थी कि प्रफेसरों ने उस चीज को नकार दिया जो उन्होंने खुद अपनी आँखों से देखी थी | इसके बाद भी वे यही सोचते रहे कि अरस्तु सही है |


. टेलीस्कोप के द्वारा गैलिलियो ने कोपरनिकस के इस सिध्धांत को सही साबित कर दिया कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केन्द्र नहीं है और पृथ्वी व् अन्य ग्रह सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं | परन्तु जब उसने जनविश्वास को बदलने की कोशिश की, तो उसे जेल में डाल दिया गया |


. इसके बाद जब गैलिलियो ने यह साबित किया कि धरती चपटी नहीं बल्कि गोल है तब उन्हें सूली पर चढ़ा  दिया गया |


. जब राईट ब्रदर्स ने यह कहा कि वे हवा से भारी चीज को हवा में उड़ा  कर दिखाएँगे (हवाई जहाज) तब लगभग सारे न्यूज पेपर वालों के उन्हें दिमागी रूप से पागल करार दे दिया था |


. जब ग्राहम बेल ने आम जनता से यह कहा कि उनकी कंपनी में पैसे लगाएं और वे एक ऐसी मशीन बनाने वाले हैं जिससे दूर बैठे दो लोग आपस में एक तार के माध्यम से बात कर सकेंगे | तब उनपर जनता को गुमराह कर पैसे ऐंठने के आरोप लगाए गए (टेलीफोन)


. १९४० में स्वीटजरलैंड में बनी घड़ियों की पूरी दुनिया में धाक थी | उस समय पुरे विश्व में ८०% घड़ियाँ स्विटजरलैंड की बनी होती थी और वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या ८०००० होती थी | जब उनके सामने डिजिटल घड़ी का विचार रखा गया तब उन्होंने इसे मजाक में उड़ा दिया | उसके केवल १५ साल बाद इन घड़ियों के कारोबार में जापान ने पुरे बाजार का ८०% डिजिटल घड़ियों से जीत लिया और केवल % बाजार ही स्विटजरलैंड की घड़ियों का का रहा और कर्मचारियों की संख्या भी घटकर १२००० रह गयी |

. समुद्र की यात्रा के दौरान एक आम बीमारी है जो समुद्र यात्रियों को हो जाती है "स्कर्वी" | इस बीमारी से १५०० से लेकर १७७६ के बीच लगभग ७०००० समुद्र यात्रियों की मौत हो गयी | जबकी इस बीमारी के इलाज के बारे में डॉ लिंड जो ब्रिटिश नौसैनिक के डॉ थे ने १७१३ में बताया था कि यह बीमारी निम्बू या निम्बू रस या खट्टे फलों के सेवन से समाप्त हो जाती हैकिन्तु उनके इस महान योगदान पर उस समय किसी ने कोइ ध्यान नहीं दिया बल्कि उनका मजाक उडाया गया | उन्होंने कहा "कुछ लोगों को कभी यह यकीन नहीं दिलाया जा सकता कि इतनी खतरनाक और भयानक बीमारी का इलाज इतने आसान तरीके से हो सकता है | अगर इसकी जगह कोइ लंबी चौड़ी उपचार प्रक्रिया होती जिसका शीर्षक होता "स्क्र्वीग्रस्त प्रतिरोधक स्वर्णिम सार" तो शायद इस पर लोग जल्दी विश्वास कर लेते |" हजारों लोग केवल इस वजह से मारे गए क्योंकी उन्हें डॉ लिंड के द्वारा बताया इलाज समझ नहीं आया था |

. हेनरी फोर्ड प्रथम (फोर्ड कार कंपनी के मालिक / जनक) को अपनी कंपनी की बनायी "टी" मोडल कार से इतना प्रेम हो गया था कि उन्होंने यह मान लिया कि वे दुनिया की सर्वोत्तम कार बना चुके हैं  और अब इस क्षेत्र में और नया कुछ नहीं होगा | उनकी इस सोच का लाभ उठाया जनरल मोटर्स ने | उन्होंने बाजार में कारों के नए नए मोडल पेश किये जिसे जनता ने हाथों हाथ लिया और देखते ही देखते जनरल मोटर्स ने फोर्ड मोटर को पीछे छोड़ दिया | हालत फोर्ड मोटर के दिवालिया होने तक की गयी थी |

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Posted on :11/17/2013 6:54:42 PM
   
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