Kahani Sangrah-Real Story Total Real Story - 8
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अमरीका की धावक गेल डेवर्स

इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता.

अगर इंसान चाहे तो वह पहाड़ को भी हिला कर दिखा सकता है

मंद बुद्धि से महानता तक.

इंसानी जज़बे की सच्ची कहानी

Ghanshyam Das Birla (April 10, 1894 – June 11, 1983)

जिलेट

मंद बुद्धि से महानता तक.
 
 
तीन वैज्ञानिकों का प्रेरणादायी जीवन - अपनी बुद्धिमता से दुनिया को अनूठे तोहफे देने वाले कुछ महान लोग अजीब आदतों के शिकार थे और उन्हें दुनिया भी फिसड्डी ही मानती थी. शुरू में लोगों ने उन्हें ताने दिए और उन्हें सनकी, पागल और नाकारा समझा. लेकिन जब इन लोगो ने अपनी काबिलियत का परिचय दिया तो दुनिया में परिवर्तन आ गया.

सर आइज़क न्यूटन (25 December 1642 – 20 March 1727) - दुनिया को गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत देने वाले सर आइज़क न्यूटन शुरुआती दिनों में ठीक प्रकार से बोल भी नहीं पाते थे. वे स्वभाव से काफी गुस्सैल थे और लोगों से कम ही वास्ता रखते थे. उनके इसी व्यव्हार के कारण उनके मित्र भी न के बराबर थे. सर आइज़क न्यूटन अपने विचार भी सही ढंग से व्यक्त नहीं कर पाते थे, वह अपने उपलब्धियों या खोज को बताने में संकोच करते कि कहीं वह हंसी के पात्र न बन जाएं. शुरुआती दिनों में न्यूटन कई प्रकार के प्रयोग करते रहते थे. न्यूटन के व्यव्हार के कारण उन्हें सनकी और पागल समझा गया पर लोगों की परवाह किये बगैर वे अपने शोध में लगे रहे और अंततः एक महान वैज्ञानिक बनकर उभरे और एक अविष्कारक के रूप में विख्यात हुए.

थॉमस अल्वा एडिसन (11 February 1847 – 18 October 1931) - आज आपके कमरे में जो बल्ब रौशनी करता है, उसका आविष्कार थॉमस अल्वा एडिसन ने किया था. विद्युत् बल्ब के जनक के नाम से मशहूर थॉमस अल्वा एडिसन को शुरू में फिस्सड्डी और मंद बुद्धि बालक समझा जाता था, लेकिन निरंतर परिश्रम के बल पर एक दिन उन्होंने अपने अविष्कार से सारी दुनिया प्रकाशमय कर दी. थॉमस अल्वा एडिसन ने सिर्फ बल्ब ही नहीं, बल्कि सैकड़ों अन्य अविष्कार भी दुनिया को दिए। वे अधिकांश समय अपनी प्रयोगशाला में बिताते थे. अविष्कारों को लेकर उनके जूनून को देखकर लोग उन्हें सनकी और पागल तक समझने लगे थे। बचपन में भी वे अजीब हरकतो के लिए जाने जाते थे. कहा जाता है कि एक बार चिड़ियों को कीड़े खाते देख उन्होंने यह सोचा कि उड़ने के लिए कीड़े खाना शायद जरुरी है. बस कुछ कीड़े इकट्ठे कर उसका घोल बनाकर उसे अपने दोस्त को पिलाने कि कोशिश की. वे देखना चाहते थे कि उनका दोस्त इसके बाद उड़ने लगेगा या नहीं. जाहिर है कि उन्हें सबने खूब डांटा और उनपर पाबंदिया भी लगाई गई. पर उनकी इसी जिज्ञासु प्रवित्ति ने दुनिया बदल दी.

अल्बर्ट आइंस्टीन (14 March 1879 – 18 April 1955) - महान वैज्ञानिकों में अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम सबसे पहले रखा जाता है. 1879 में जन्मे अल्बर्ट आइंस्टीन तीन साल तक डिस्लेक्सिया से पीड़ित थे और बोल भी नहीं पाते थे. तेरह साल कि उम्र तक वह अपने जूतो के फीते बांधना भी नहीं सीख पाये थे. अल्बर्ट आइंस्टीन शुरू में न तो गुणा भाग कर पाते थे और न ही शब्दों को सही तरह से लिख पाते थे. उनके शिक्षक हमेशा उनके बारे में नकारात्मक टिपण्णी करते थे. अल्बर्ट आइंस्टीन सामान्य सापेक्षता (general relativity) का सिद्धांत प्रतिपादित कर इतिहास में अमर हो गए. उनके इस सिद्धांत से विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति आ गयी। अपनी इस उपलब्धि के लिए वह आधुनिक भौतिकी के जनक कहलाये. अल्बर्ट आइंस्टीन को विज्ञान में अद्भुत योगदान, खासकर law of photoelectric effect कि खोज के लिए 1921 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

दोस्तों, इन माहन वैज्ञानिकों का जीवन दर्शाता है कि कमजोर शुरुआत और दुनिया भर के विरोध के बावजूद धुन का पक्का व्यक्ति कुछ भी कर गुजर सकता है। हमें भी इनसे सीख लेते हुए सामने आने वाली मुश्किलों से घबराये बिना निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए और एक दिन अपने सपनो को साकार करना चाहिए।
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Posted on :8/8/2015 3:04:12 PM
   
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