Kahani Sangrah-Shero Shayri Total Shero Shayri - 29
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हर किसी की मिट जाना है

"You Start Dying Slowly"

चलना हमारा काम है।

सामने हों मंजिल तो रास्ते ना मोडना...

परेशानियों से भागना आसान होता है...

खुदी को कर बुलंद इतना ..........

कुछ भी कर गुजरने को मौसम नहीं मन चाहिए

जिंदगी है तो "ख्वाब" हैं

परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की

हो के मायूस ना यूँ शाम से ढलते रहिये

सोच को बदलो सितारे बदल जायेंगे

हर लब पे तेरा ही नाम होगा

हारता जो नहीं मश्किलों से कभी

जो सफर इख्तियार करते हैं, वही मंजिलों को पार करते हैं

मंजिल उन्हीं की मिलती है जिनके सपनों में जान होती है

गम की अंधेरी रात में, खुद को ना यूँ बेकरार कर...

मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है...

गम ना कर जिंदगी बहुत बड़ी है...

मंजिले इंसान के हौंसले को आजमाती है,

नींद नहीं सपने बदलते हैं.

खोकर पाने का मजा ही कुछ और है...

लक्ष्य कोई भी बड़ा नहीं, जीता वही जो डरा नहीं...

झुकता वही है जिसमें जान होती है, अकड़ तो मुर्दे की पहचान होती है...

हर दिन अपनी जिन्दगी को एक नया ख्वाब दो...

कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती.

नजरो को बदलो तो नज़ारे बदल जाते है.

ना संघर्ष ना तकलीफें, क्या है मजा फिर जीने में...

जंग हो तो जितने, का विस्वास होना चाहिए.

सोचो तो सभी प्रश्न सरल होते हैं

चलना हमारा काम है।
 
 
गति प्रबल पैरों में भरी

फिर क्यों रहूँ दर दर खड़ा
जब आज मेरे सामने
है रास्ता इतना पड़ा
जब तक न मंज़िल पा सकूँ,
तब तक मुझे न विराम है, चलना हमारा काम है।


कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया
कुछ बोझ अपना बँट गया
अच्छा हुआ, तुम मिल गईं
कुछ रास्ता ही कट गया
क्या राह में परिचय कहूँ, राही हमारा नाम है,
चलना हमारा काम है।


जीवन अपूर्ण लिए हुए
पाता कभी खोता कभी
आशा निराशा से घिरा,
हँसता कभी रोता कभी
गति-मति न हो अवरुद्ध, इसका ध्यान आठो याम है,
चलना हमारा काम है।


इस विशद विश्व-प्रहार में
किसको नहीं बहना पड़ा
सुख-दुख हमारी ही तरह,
किसको नहीं सहना पड़ा
फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँ, मुझ पर विधाता वाम है,
चलना हमारा काम है।


मैं पूर्णता की खोज में
दर-दर भटकता ही रहा
प्रत्येक पग पर कुछ न कुछ
रोड़ा अटकता ही रहा
निराशा क्यों मुझे? जीवन इसी का नाम है,
चलना हमारा काम है।


साथ में चलते रहे
कुछ बीच ही से फिर गए
गति न जीवन की रुकी
जो गिर गए सो गिर गए
रहे हर दम, उसीकी सफलता अभिराम है,
चलना हमारा काम है।


फकत यह जानता
जो मिट गया वह जी गया
मूँदकर पलकें सहज
दो घूँट हँसकर पी गया
सुधा-मिश्रित गरल, वह साकिया का जाम है,
चलना हमारा काम है।

Posted on :9/9/2015 8:35:05 AM
   
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