Kahani Sangrah-Motivation Total Motivation - 97
Download
इसे फर्क पड़ता है

समय रहते अपने ओ दबलो...

JYADA ANALYSIS KARNE SE JYADA HAI ACTION LIYA JAYE.......

Secret of Success

Changing With Time - समय के साथ बदलने की सीख देती कहानी

पांच करोड़ के चेक का आत्मविश्वास

सही दिशा

उस जगह पर दूर-दूर तक कोई भी नही था उस लडके को यह बताने वाला की तू यह नही कर सकता|

आगे बढ़ने का

Kaise Bana Jaye Diamond........

Senior Is Always Right--- Guru Ki Drushti

किस्मत कितनी भी अच्छी हो कर्म तो करना ही पढता है

थोडा एक्स्ट्रा - डायमंडशिप पक्की

मुफ्त में कुछ नही मिलता ....

Positive Soch---Har Samasya Ka Samadhan.

मन के हरे हार है, मन के जीते जीत

ज़िद्दी बंदर

ऊंचाई चाहिए तो डाल काटनी पड़ेगी

सतत प्रयास ही सफलता की कुंजी है।

ज्ञान का दीपक

बुरा समय

अहंकार न करें

सब कुछ हमारी सोच पर ही निर्भर होता है कि आखिर हम चाहते क्या हैं।

सब कुछ हमारी सोच पर ही निर्भर होता है कि आखिर हम चाहते क्या हैं।

असली शक्ति

असली शक्ति

नाशपाती का वृक्ष

मति बदली , जीवन बदला

लम्बा कूदना है तो पीछे हटने से मत डरो

मुसीबत का सामना.......

जो विपरीत परिस्थितियों में भी सुदृढ़ रहता है और बुद्धि से काम लेता है वही सच्चा हीरा है।

फर्क सिर्फ सोच का होता है.....

नजरिये की ताकत

लोग क्या सोचेगे + नकारात्मक सोच।

कुछ करने का सब से अच्छा समय कब है?

पुराना रिवाज - हमें भी समय के हिसाब से अपनी सोच को विकसित करना चाहिए

किसान की सिख - अपना कर्तव्य निभाना ज़रूरी है ,लेकिन परिस्थिति के हिसाब से

गेहू के 5 दाने-मिली हुई जिम्मेदारी को अच्छी तरह से निभाना

लड़ने वालो के कदमो में जहा होता है|

DUSRO KO BADLNE SE PEHLE KHUD KO BADLO.

POSITIVE SOCH KA PARINAM

सबसे बड़ा धनुर्धर

आज ही क्यों नहीं ?

नजरिया

खुद पर विस्वास करने वाला हमेशा सफल होता है...

हमारी कीमत...

मुट्ठी भर मेढक

क्या आप वही कर रहे हैं जो आपको करना चाहियें ?

अपने सपने पुरे करने हैं तो दुसरो को उनके सपने पुरे करने में मदद करो !

कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं.

इर्ष्या, क्रोध और अपमान.

सत्य है तो सिध्दि, प्रसिध्दि और समृद्धि है...

छोटे लोग और बड़े लोग !

आगे बढ़ने के लिए जरुरी है की लोगो को आगे बढ़ने में मदद करें...

अभ्यास ही सबसे बड़ा गुरू है !

फूटा घड़ा

अपने साथ अपने लोगों को लेकर चलें...

सहीं जगह पर मेहनत करना बहुत जरुरी है...

दिखावे का फल

जो चाहोगे सो पाओगे

नजरिया

जिंदगी की तीन सीखें.

कर्म से अधिक कर्म करने के पीछे की भावनाएं मायने रखती है.

विकास के लिए अलग-अलग सोच के लोगों का होना जरुरी है.

खुद से बात कर सकें और अपने भीतर की आवाज़ को सुन सकें , तभी हम ज़िन्दगी को और अच्छे ढंग से जी पायेंगे.

बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो...

अपनी सोच से असम्भव को संभव कर दिया.

सुखी संत एव दुखी संत.

जब कोई काम हम किसी और के भरोशे पूरा करने की सोचते हैं, तब उसे पूरा होना या ना होना दुसरो पर ही निर्भर होता है.

मैं सबसे तेज दौड़ना चाहती हूँ.

आप क्या चाहते हैं कि लोग आपको किस रूप में याद करें - सफल या असफल व्यक्ति

सत्य परेशान हो सकता है, किन्तु पराजित नहीं.

कुछ लोग अपनी सबसे बड़ी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना अपने सपने साकार कर लेते हैं.

बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते:

महात्मा जी की बिल्ली :-

जो मनुष्य आगे होने वाली बात को पहले ही से सोच लेता है, उसे अन्त में लज्जित नहीं होना पड़ता

यदि तुम किसी रिश्ते में सौ-फीसदी ईमानदार नहीं रहोगे तो तुम्हें अपने साथी पर हमेशा शक होता रहेगा

समस्याओं को जब लंबे समय तक दिमाग में रखा जाता है तब मानसिक पैरालिसिस हो जाता है

हर चीज का हल होता है, आज नहीं तो कल होता है

ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं

किसी भी बड़े कार्य को सम्पन्न करने के लिए उसकी नीव सबसे मजबूत बनानी

यदि आपका ध्यान एक लक्ष्य पर ना हो तो आप शक्तिशाली होते हुए भी हार जाते हैं

फूटा घड़ा - हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है, पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं

आगे बढ़ने के लिए बोलना ज़रूरी हैं

यदि तुम्हें पहले से संगीत का थोड़ा-बहुत ज्ञान है तब तो तुम्हें दो सौ स्वर्ण मुद्राएँ देनी होंगी

कई बार हमें चीजें जिस तरह समझनी चाहिए उसके विपरीत समझ लेते हैं

खराब प्रदर्शन का कारण क्या है यह जानना जरूरी होता है

लोगों ने उस मंदिर के भगवान से रिश्ता जोड़ा जहां पुजारी सही था

कोइ भी आपको आपकी इजाजत के बिना कुछ नहीं कर सकता

क्या दिल में रखें और क्या भूल जाएँ यह जानना भी जरूरी होता है

हमें हमारे काम में माहिर होने की ज्यादा जरुरत होती है

प्राथमिकताएं तय करना आवश्यक होता है, आप सब कुछ एक साथ नहीं पा सकते

सफलता का रहस्य क्या है

समझबूझ कर काम न करने वाले लोग अवसरों को अपने हाथ से यों ही गँवा देते हैं

मनुष्य को किसी एक विद्या या कला में दक्ष हो जाने पर गर्व नहीं करना चाहिए

हर किसी को स्वर्ग नहीं मिल सकता

कुछ लोग अपनी सबसे बड़ी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना अपने सपने साकार कर लेते हैं.
 
 

जापान  के एक  छोटे  से कसबे में  रहने वाले  दस  वर्षीय ओकायो  को  जूडो सीखने  का  बहुत शौक  था. पर बचपन  में  हुई एक  दुर्घटना  में बायाँ  हाथ  कट जाने  के  कारण उसके  माता-पिता उसे  जूडो सीखने की  आज्ञा  नहीं देते  थे. पर अब  वो  बड़ा हो  रहा  था और  उसकी  जिद्द भी  बढ़ती जा रही  थी.

अंततः  माता-पिता को  झुकना  ही पड़ा  और  वो ओकायो  को  नजदीकी शहर  के  एक मशहूर मार्शल आर्ट्स गुरु के  यहाँ  दाखिला दिलाने ले  गए.

 

गुरु  ने जब  ओकायो  को देखा  तो  उन्हें अचरज  हुआ   किबिना  बाएँ  हाथ का  यह  लड़का भला   जूडो   क्यों सीखना  चाहता  है ?

 

उन्होंने  पूछा, “तुम्हारा तो  बायाँ   हाथ ही  नहीं  है तो  भला  तुम और  लड़कों  का मुकाबला  कैसे  करोगे?”

ये बताना  तो  आपका काम  है”, ओकायो ने  कहामैं तो  बस  इतना जानता  हूँ  कि मुझे  सभी  को हराना  है  और एक  दिन  खुद “सेंसेई” (मास्टर) बनना है

 

गुरु  उसकी सीखने  की  दृढ इच्छा  शक्ति  से काफी  प्रभावित  हुए और  बोले, “ठीक है  मैं  तुम्हे सीखाऊंगा  लेकिन  एक शर्त  है, तुम मेरे  हर  एक निर्देश  का  पालन करोगे  और  उसमे दृढ  विश्वास  रखोगे.”

ओकायो  ने सहमती  में  गुरु के  समक्ष  अपना सर  झुका  दिया.

 

गुरु  ने एक  साथ लगभग  पचास छात्रों  को जूडो  सीखाना  शुरू किया. ओकायो  भी अन्य  लड़कों  की तरह  सीख  रहा था. पर  कुछ दिनों  बाद  उसने ध्यान  दिया  कि गुरु  जी  अन्य लड़कों  को  अलग-अलग दांव-पेंच  सीखा रहे  हैं  लेकिन वह  अभी  भी उसी  एक  किक का  अभ्यास  कर रहा  है  जो उसने  शुरू  में सीखी  थी. उससे रहा  नहीं  गया और  उसने  गुरु से  पूछा, “गुरु जी  आप  अन्य लड़कों  को  नयी-नयी चीजें  सीखा  रहे हैं, पर  मैं अभी  भी  बस वही  एक  किक मारने  का  अभ्यास कर  रहा  हूँ. क्या मुझे  और  चीजें नहीं  सीखनी  चाहियें ?”

 

गुरु  जी बोले, “तुम्हे  बस इसी  एक  किक पर  महारथ  हांसिल करने  की  आवश्यकता है”   और वो आगे बढ़ गए.

 

ओकायो  को विस्मय हुआ  पर उसे  अपने  गुरु में  पूर्ण  विश्वास था  और  वह फिर  अभ्यास  में जुट  गया.समय बीतता  गया  और देखते-देखते  दो साल  गुजर  गए, पर ओकायो  उसी  एक किक  का  अभ्यास कर  रहा  था. एक बार  फिर  ओकायो को चिंता होने लगी और उसने गुरु  से  कहा, “क्या अभी  भी  मैं बस  यही  करता रहूँगा  और बाकी सभी  नयी तकनीकों  में पारंगत  होते  रहेंगे?”

 

गुरु  जी बोले, “तुम्हे  मुझमे यकीन  है  तो अभ्यास  जारी  रखो

 

 

ओकायो ने गुरु कि आज्ञा का पालन करते हुए  बिना कोई प्रश्न पूछे अगले  6 साल तक  उसी  एक किक  का  अभ्यास जारी  रखा. सभी को जूडो सीखते आठ साल हो चुके थे कि तभी एक दिन  गुरु जी ने सभी शिष्यों को बुलाया और बोले "मुझे आपको जो ज्ञान देना था वो मैं दे चुका हूँ और अब गुरुकुल  की परंपरा  के अनुसार सबसे  अच्छे शिष्य  का  चुनाव एक प्रतिस्पर्धा के माध्यम  से किया जायेगा  और इसमें विजयी होने वाले शिष्य को “सेंसेईकी उपाधि से सम्मानित किया जाएगा.”

 

प्रतिस्पर्धा आरम्भ हुई.

 

गुरु जी ओकायो  को उसके  पहले  मैच में हिस्सा लेने के लिए आवाज़ दी .ओकायो ने लड़ना शुर किया और खुद को  आश्चर्यचकित करते  हुए  उसने अपने  पहले  दो मैच  बड़ी  आसानी से  जीत  लिए. तीसरा मैच  थोडा कठिन  था, लेकिन कुछ  संघर्ष  के बाद  विरोधी  ने कुछ  क्षणों  के लिए  अपना  ध्यान उस पर से हटा दिया, ओकायो को  तो  मानो इसी  मौके  का इंतज़ार  था , उसने अपनी  अचूक  किक विरोधी  के  ऊपर जमा  दी  और मैच  अपने  नाम कर  लिया. अभी भी  अपनी  सफलता से  आश्चर्य  में पड़े  ओकयो  ने फाइनल  में  अपनी जगह  बना  ली.

इस  बार विरोधी  कहीं अधिक ताकतवर, अनुभवी  और विशाल   था. देखकर ऐसा  लगता  था कि  ओकायो उसके सामने एक मिनट भी  टिक नहीं  पायेगा.

 

मैच  शुरू हुआ, विरोधी  ओकायो पर  भारी  पड़ रहा  था, रेफरी ने  मैच  रोक कर  विरोधी  को विजेता  घोषित  करने का  प्रस्ताव  रखा, लेकिन तभी  गुरु  जी ने  उसे रोकते हुए कहा, “नहीं, मैच पूरा  चलेगामैच फिर  से  शुरू हुआ.

 

विरोधी  अतिआत्मविश्वास  से  भरा हुआ   था  और अब  ओकायो  को कम आंक रहा था. और इसी  दंभ में  उसने  एक भारी  गलती  कर दी, उसने  अपना गार्ड  छोड़  दिया!!  ओकयो  ने इसका फायदा उठाते हुए आठ साल  तक  जिस किक  की प्रैक्टिस की  थी  उसे पूरी  ताकत  और सटीकता  के साथ  विरोधी  के ऊपर  जड़  दी और  उसे  ज़मीन पर  धराशाई कर  दिया. उस किक  में  इतनी शक्ति  थी की  विरोधी  वहीँ मुर्छित  हो  गया और  ओकायो  को विजेता  घोषित  कर दिया  गया.

 

मैच  जीतने के  बाद  ओकायो ने  गुरु  से पूछा, "सेंसेई, भला मैंने  यह प्रतियोगिता  सिर्फ  एक मूव  सीख  कर कैसे  जीत  ली ?”

तुम दो  वजहों  से जीते,”  गुरु जी ने  उत्तर  दिया. “पहला, तुम ने जूडो  की एक  सबसे  कठिन किक  पर  अपनी इतनी  मास्टरी कर  ली कि शायद  ही  इस दुनिया  में  कोई और  यह  किक इतनी  दक्षता   से मार  पाए, और दूसरा  कि  इस किक  से  बचने का  एक  ही उपाय  है , और वह  है  वोरोधी  के  बाएँ  हाथ को  पकड़कर  उसे ज़मीन  पर  गिराना.”

 

ओकायो  समझ चुका था कि आज उसकी  सबसे बड़ी  कमजोरी  ही उसकी  सबसे  बड़ी ताकत बन  चुकी थी.

 

मित्रों मनुष्य(human being) होने का मतलब ही है अधुरा (imperfect) होना. अधूरापन(Imperfection) अपने आप में बुरी नहीं होती, बुरा होता है हमारा उससे काम (deal) करने का तरीका.अगर ओकायो चाहता तो अपने बाएँ हाथ के ना होने का रोना रोकर एक अपाहिज की तरह जीवन बिता सकता था, लेकिन उसने इस वजह से कभी खुद को हीन नहीं महसूस होने दिया. उसमे अपने सपने को साकार करने की दृढ इच्छा थी और यकीन जानिये जिसके अन्दर यह इच्छा होती है भगवान उसकी मदद के लिए कोई ना कोई गुरु भेज देता है, ऐसा गुरु जो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी को ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बना उसके सपने साकार कर सकता है.

Posted on :8/10/2015 1:49:18 PM
   
  blog web counter
 
Google Ads