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Question : नेटवर्क मार्केटिंग क्या होती है ? यह एक गैरकानूनी काम है ?
Ans :

        आपकी शंका बिलकुल सही है | आज आमतौर पर और आम जनता के मन में यही विचारधारा बनी हुयी है की यह एक गैकानुनी काम है और वे इसे समझ नहीं पाते हैं | आईये इसे साधारण तरीके समझाने काप्रयास करते हैं |

        प्रत्येक कंपनी अपने बिजनेस को बढाने के लिए निरंतर नए नए प्रयोग करती रहती है और बिजनेस बढाने का सीधा सीधा अर्थ है अपनी सेल बढाना | इस संदर्भ में बिजनेस में अनेकों मॉडल आये जैसे फ्रेचाईजी एजेंसी डीलर ब्रोकर पार्टनर वगैरह वगैरह | हर बार कम्पनियों ने उन लोगों को अपने बिजनेस से जोड़ने का प्रयास किया जिनके पास निवेश के लिए कम पैसा था लेकिन बिजनेस करने के लिए ज्यादा योग्यता | कम्पनीयों का अंतिम उद्देश्य था की उनके उत्पाद अंतिम ग्राहक तक जा पायें और उनके प्रत्येक ग्राहक उनके उत्पाद को और ज्यादा प्रमोट कर कंपनी की सेल को बढायें | और इस प्रयास में सन 1930 में जन्म हुआ MLM का |

 

        MLM - Multi LevelMarketing एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें ग्राहक को कम्पनी अपने लाभ का हिस्सेदार बनने का अवसर देती है और वो भी बिना किसी निवेश और प्रशिक्षण के | यह विचारधार सन 1930 में सबसे पहले अस्तित्व में आयी जब एक कंपनी के इस विचारधारा के साथ अपना काम शुरू किया | उस कम्पनी के मालिकों को इस विचारधारा के परिणामों का ज्ञान नहीं था की आम आदमी को जब उत्पाद लेने के साथ पैसा कमाने का अवसर मिल जाए तो वे क्या करंगें | आम लोगों ने अगले 5 साल में कंपनी का व्यवसाय इतना बढ़ा दिया की कंपनी की उत्पाद आपूर्ती सेवा उत्पाद की मांग को पूरा करने में असफल हो गयी | इसका परिणाम यह रहा की उस कंपनी को सेल की अधिकता के कारण बंद होना पडा | इस शक्ति को बिजनेस की दुनिया के दिग्गजों ने तुरंत पहचान लिया और उनकी देखा देखी बहुत से लोगों ने इस विचारधारा को अपना लिया | लेकिन साथ में कुछ गलत तत्व भी इस विचारधारा में आ गए जो हर क्षेत्र में होता है और उन्होंने उत्पाद की जगह सीधे पैसों का लेनदेन प्रारम्भ कर दिया | इस पैसों के लेनदेन को ही मनी रोटेशन के नाम से जाना गया और बाद में इसे कानूनन गलत करार दे दिया गया | इस पुरे घटनाक्रम में जो परिणाम सामने आये हम उसे समझने का प्रयास करते हैं :-

 

        MLM - Multi LevelMarketing – एक इंडस्ट्री बन चुकी है ठीक वैसी ही जैसे सोफ्टवेयर सीमेंट आयरन कपड़ा तेल वगैरह वगैरह इंडस्ट्री हैं, और इनमें अनेकों कंपनी काम करती हैं | इन कम्पनीयों को उनके कार्यशैली के आधार पर तीन भागों में बांटा जा सकता है |

 

                                   नेट्वर्किंग कंपनी – नेट्वर्किंग शब्द का जन्म कम्पूटर के साथ ही हुआ है | कम्पूटर में नेट्वर्किंग करने का अर्थ होता है अलग अलग कम्पूटर को तार या इन्टरनेट या वारलेस के माध्यम से आपस में जोड़ना | इसी तर्ज पर मनी रोटेशन कंपनी भी काम करती हैं | मतलब जैसे कम्पूटर की नेट्वर्किंग में यदि कोइ तार ना जुड़ा हो तो कम्पूटर काम नहीं करता उसी प्रकार नेट्वर्किंग कंपनी में जब तक आपके डाउन में सभी खाली जगह भर ना जाए आपको कमीशन नहीं मिलता है | दूसरा यह कम्पनियां आपके दिए हुए पैसों के बदले उतनी ही कीमत का सामान या सर्विस नहीं देती हैं या कोइ सामान या सर्विस ही नहीं देती हैं | इस कारण यह कम्पनियां मनी रोटेशन कंपनी बन जाती हैं अर्थात जहां कम कीमत के सामान को अधिक कीमत पर बेचना या किसी भी सामान या सर्विस को नहीं देना | इस कारण यह कम्पनियां गैरकानूनी बन जाती हैं | इन्हें पहचानने के लिए आप 2 सवालों के जवाब पर ध्यान दे सकते हैं पहला मैंने जो पैसे दिया उसके बदले मुझे क्या मिला और जो मिला उसका मूल्य उतना ही था या नहीं जितना मैंने पैसा दिया | दूसरा मेरे माध्यम से आने वाले व्यक्ति को उसके दिए पैसों के बदले क्या मिला ? क्योंकी कुछ कंपनी डेफर्ड पेमेंट के नाम भी मनी रोटेशन करती हैं | मतलब आप अभी थोड़ा पैसा देकर मेंमबर बन जाओ और जब आप बचा पैसा दोगे आपको उत्पाद मिल जाएगा तब तक आप लोगों को जोड़ो और पैसे कमाओ | ध्यान रखें ऐसी कंपनी पूर्णत: गैरकानूनी होती हैं |

            नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी – यह वे कंपनी हैं जो आपको आपके दिए गए पैसों के बदले उतनी ही कीमत का सामान देती हैं | यह कम्पनी 100% कानूनी होती हैं | ये कम्पनी वास्तव में पुरानी मार्केटिंग और वितरण प्रणाली को नए रूप में चला रही होती हैं | ये कम्पनी मूल रूप से मासिक आधार पर उपयोग होने वाले सामानों में बिजनेस करती हैं और इनका कमीशन कुल बिक्री मूल्य पर प्रतिशत में दिया जाता है जो आमतौर पर पुराने सिस्टम में भी होता है | इनके साथ बिजनेस करने के लिए आपको एक सेल्समैन की तरह ट्रेनिंग लेनी होती है और एक बेहतर सेल्समैन बनना होता है | इन कम्पनियों के साथ लाभ यह है की आप इनके साथ बिना निवेश बिजनेस शुरू कर पाते हैं और बाद में जब ज्यादा विक्रय करने लगते हैं तब कम्पनी आपको डिपो खोल कर दे देती है |

           रेफरल मार्केटिंग कंपनी – यह वे कंपनी हैं जो केवल आपके द्वारा रेफर करने पर कमीशनदेती हैं | इनके साथ आपको कभी डिपो खोलने या विक्रय पर आधारित कमीशन या मासिक आधार पर उपयोग में आने वाले प्रोडक्ट नहीं मिलते हैं | इनके प्रोडक्ट भी आपको उतनी ही कीमत के मिलते हैं जितना आप भुगतान करते हैं | इन कम्पनियों के साथ भी लाभ यह है की आप इनके साथ बिना निवेश बिजनेस शुरू कर पाते हैं | आप केवल उपभोक्ता की तरह इन कम्पनियों से जुड़ते हैं लेकिन आपके आगे रेफर करने से होने वाले विक्रय पर आप इन कम्पनियों के लाभ के भागीदार बन जाते हैं, इसलिए ये कम्पनी भी 100% लीगल होती हैं |

 
 
Question : इस तरह चैन सिस्टम या स्कीम में आख़री आदमी घाटे में रहता है |
Ans :

        आपका कहना सही लगता है,पहली नजर में यही लगता है की आख़िरी आदमी को घाटा हो जाएगा | लेकिन सोच कर देखिये१. आख़िरी आदमी जैसा कोइ शब्द वास्तव में है क्या ? केवल इंडिया में प्रति मिनट५००० बच्चे पैदा होते हैं २. यदि हर आदमी को उसके दिए गए पैसों के बदले उतनी कीमतका सामान मिल जाता है तो उसे घाटा किस बात को हो सकता है ? क्योंकी आख़िरी आदमीअधिक से अधिक उपभोक्ता बन सकता है घाटे में तो रह ही नहीं सकता |

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Question : ये नेटवर्क मार्केटिंग क्या है और इसके क्या फायदे हैं ?
Ans :




 
 
 
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